कोविड टीके के मनमाने दाम पर मानवाधिकार में दस्तक

उत्तराखंड मसूरी

मसूरी
पहले टीका न मिलने और अब टीका के दामों को लेकर लोगों में आक्रोश बना हुआ है। ऐसा नही कि टीके के दाम को लेकर मसूरी में ही लोगों में गुस्सा है, बल्कि महानगरों में भी में खूब गुस्सा है। सरकार की विफलताओं की फहरिस्त में यह भी जुड़ गया है। कुछ निजी अस्पतालों ने लोगों से वैक्सीनेशन के मनमाने दाम वसूलने शुरू कर दिए है। जिसका मसूरी ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसियेशन ने कड़ा विरोध किया और इसके विरू़द्व मानव अधिकार आयोग में आवाज उठायी है। व्यापार संघ की शिकायत आयोग में दर्ज की गई है। संघ के अध्यक्ष रजत अग्रवाल, महामंत्री जगजीत सिंह कुकरेजा और कोषाध्यक्ष नागेंद्र उनियाल ने आश्वस्त किया कि जल्द ही इस पर फैसला आ जाएगा।

, सेवामें

02.06.2021
मानव अधिकार आयोग,
नयी दिल्ली

विषय :- कोरोना वैक्सीन के रेट निर्धारित न करके मानव अधिकारों का हनन करना व् अधिक फायदा पहुंचाकर काला बाज़ारी को मौका देना-

महोदय,

आपको अवगत कराना है की कोविद के टीकाकरण के अंतर्गत 18 वर्ष से 44 वर्ष के व्यक्तियों का टीकाकरण सरकार द्वारा बिना किसी शुल्क के मुफ्त में किया जा रहा है ।

हाल ही में कोविद के टीके की कमी के कारण ये कार्य रुक गया और अधिकांश सरकारी केंद्र बन्द हुए व निजी हॉस्पिटल द्वारा ये कार्य मनमाने मूल्य पर किया जा रहा है व सरकार ने चुप्पी साधी वी है व इस वैक्सीन या टीके का कोई भी रेट निर्धारित नहीं है । प्राइवेट हॉस्पिटल व संस्थानों को कोविड वैक्सीन की एक डोस रुपय 600 में मिलती है जो निर्धारित सरकार द्वारा परंतु इसी वैक्सीन को लगाने की कीमत को सरकार द्वारा तय नहीं किया गया है आज तक ।

केंद्र व् राज्य सरकार द्वारा हर दवाई के , हर बिमारी के इलाज के व् हर वैक्सीन के रेट व् उपचार के रेट निर्धारित किये गए हैं व् समय समय पर इसकी सूचना वेबसाइट पर , अखबारों से व् सोशल मीडिया से जनता को मिलती रहती है ।

यहाँ तक की एक छोटे से बिस्कुट के पैकेट को भी अधिकतम मूल्य (maximum retail price) पर बेचने का सन्देश होता है अन्यथा जुर्माना लगाया जाता है ।

देश में कोरोना जैसी त्रासदी के चलते भी सरकार ने अनेक दवा के व् टेस्ट के व् उपचार के रेट जनता की सहूलियत के लिए फिक्स कराये , निर्धारित किये, जिससे की कोई भी हॉस्पिटल या व्यक्ति जनता को भ्रमित कर अधिक पैसे न वसूल सके ।

बहुत ही अफ़सोस की बात है की इतना सब करने के बावजूद मानव अधिकारों का हनन हो रहा है , कोरोना की वैक्सीन अर्थार्त कोविद के टीके का मूल्य सरकार द्वारा तय व् निर्धारित नहीं किया गया जिससे की टीके की कीमत में हॉस्पिटलों व् प्राइवेट संस्थनों द्वारा मनमानी रेट वसूले जा रहे हैं । ये वैक्सीन देश के सभी नागरिकों को 2 बार लगनी है , असल में सरकार द्वारा ये वैक्सीन मुफ्त होनी चाहिए क्योंकि ऐसी आपदा के लिए सरकार द्वारा टैक्स वसूला जाता है व् नागरिकों का स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए ।

जीला देहरादून में कोविद वैक्सीन कविशिएल्ड के रेट में भारी अंतर है व् ये वैक्सीन 895 रूपए से लेकर 1200 रूपए में लगाई जा रही है ।

कया सरकार द्वारा कोविद वैक्सीन के रेट का मूल्यकान कर एक रेट नहीं रखना चाहिये था ?
कया ये कॉर्पोरेट जगत के हॉस्पिटलों की काला बाज़ारी नहीं दर्शाता ?
क्या सरकार द्वारा काला बाज़ारी को बढावा नहीं दिया जा रहा है ?
कया भारत के आम नागरिक के साथ ये छल नहीं हो रहा जहाँ पर बिस्कुट के पैकेट को तो निर्धारित मूल्य पर बेचना अनिवार्य है पर जान बचाने की वैक्सीन दवा के मूल्य निर्धारित नहीं है ।

एक छोटे दुकानदार का चालान व् जुर्माना काटा जाता है अगर वह 1 रूपए भी अधिक ले ले, पर अगर कोई वैक्सीन पर 400 रूपए भी अधिक लय उसपर कोई कार्यवाही नहीं ।
ये मानव के अधिकारों का हनन है ।
भारत वर्ष के हर नागरिक के हक़ व् अधिकार का हनन है ।

उचित कार्यवाही की उम्मीद करते हैं ।
आपके आभारी होंगे ।

धन्यवाद्
मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन
रजत अग्रवाल – 9897055999
लंडौर बाज़ार, मसूरी, उत्तराखंड
जगजीत कुक्रेजा – 9719737456
नागेन्द्र उनियाल – 9557016977

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