कोरोना से पर्यटन व्यवसाय चैपट, सरकार से आर्थिक पैेकेज की मांग

उत्तराखंड जन समस्या

मसूरी।

कोरोना संक्रमण से पर्यटन नगरी की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। होटल उद्योग हो या आम व्यापारी, टैक्सी वाला हो या छोटा दुकानदार सभी इस कारोना से प्रभावित हुए हैं हालात यह है कि इस बार गत वर्ष से बुरा हाल होने वाला है। पर्यटन शून्य हो चुका है और यही मसूरी की रोजी रोजी का आधार था।
इस संबंध में मसूरी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष आर एन माथुर ने कहा कि कोरोना संक्रमण ने पर्यटन उद्योग को बर्बाद करके रख दिया। उन्होंने कहा कि एक ओर तो व्यवसाय शून्य हो चुका है वहीं दूसरी ओर सरकार ने बिजली की दरें बढा दी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कहा कि टेस्ट करवाकर पर्यटक आ सकता है लेकिन ऐसे माहौल में पर्यटक क्यों आयेगा जब वह यहां घूम नहीं सकता यहां पहले ही मिनी लाॅक डाउन लगा है वहीं दिल्ली सहित देश के अन्य भागों में पूरी तरह लाॅक डाउन है। उन्होंने बताया कि अपै्रल माह पूरा पर्यटन शून्य रहा और मई भी इसी तरह होगा उसके बाद भी नहीं लगता की कोरोना से राहत मिलेगी। उन्होंन प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह पर्यटन उद्योग से जुड़े सभी को राहत दे जिसमें बिजली पानी के बिलों को कम किया जाय, हाउस टैक्स कम किया जाय व कर्मचारियों के वेतन में सहयोग करे। वहीं उत्तराखंड होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप साहनी ने कहा कि कोरोना से पूरे उत्तराखंड का भारी नुकसान हुआ है क्यों कि पर्यटन ही यहां की आर्थिकी का आधार है जिसमें होटल, टैक्सी, दुकानदार, गेस्ट हाउस, पूजा का सामान बेचने वाला, चाल खाल वाला यानि हर क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है उससे कोई चमत्कार ही बचा सकता है। क्यों कि चारधाम यात्रा बंद हो गई व गर्मियों का सीजन तो पहले ही जीरो हो चुका है। होटल एसोसिएशन के महासचिव संजय अग्रवाल ने भी कहा कि मसूरी का पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह चैपट हो गया है तथा होटल व्यवसायियों सहित सभी परेशान हैं। मसूरी व्यापार संघ के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि मसूरी की रोजी रोटी व रोजगार पर्यटन पर आधारित है लेकिन कोरोना के चलते सब समाप्त हो गया यहां तक कि लोगों के भूखे मरने की नौबत आ गई है। उन्होंने कहा कि गत वर्ष भी कोरोना में बहुत नुकसान हुआ व सरकार से मांग की थी कि व्यापारियों को आर्थिक पैकेज दिया जाय लेकिन सरकार ने कोई मदद नही की वहीं इस बार भी मांग कर रहे है कि बिजली पानी के बिलों को माफ किया जाय, जीएसटी में राहत दी जाय, कर्मचारियों के वेतन में सरकार अंशदान करे व बैंक ऋण लेकिन सरकार से उम्मीद नही है व्यापारी सरकार से नाराज हो चुका है और आगामी चुनावों में बंगाल की तर्ज पर यहां भी सरकार को सबक सिखाया जायेगा।

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